शुक्रवार, 5 जून 2020

होली के गीत

होली के गीत
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बसंत की पगडन्डियों से चलकर,
फूलो के रंगों से सजकर,
भोर के गालो पर गुलाल मलने
उषा को और सिंदुरी करने,
भौंरा बन फूलो के गाल सहलाने,
वृंदावन की गलियो में धूम मचाने,
कान्हा-औ-गोपियों संग रास रचाने ,

सरसों कों पीली चुनरी ओढाने,
लाल-गुलाबी ओढनी रंगने,
मलय सी हवाओ को और महकाने,
वेणी मे अपनी गुलाब गूँथवाने,

गाँव मे,बागों में,खेतों में,दरख्तों में,
हर गली ,कूचे मेरंग महकाने,
हर अटारी, हर छज्जे, हर खिड़की ,दरवाजे को खुलवाने !
सुन री सखी ,फाल्गुन आ गया है!!!
©कविता वर्मा

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