मैं गुज़र रही हूँ
आजकल मुझमे से,
होकर तेरे रास्ते।।
जो कदम लड़खड़ा गए,
रोक लेना कुछ देर और तेरे रास्ते।
दरमियाँ ना शिकस्त है,
इस कदर मिल गए है साये,
जैसे गुज़रा बूढा दिन हो और जवान होती रात।
पहचान लेना इस बीच मुझे मेरे लिबास से,
कुछ दर्द कुछ गम को लपेट रखा है।
तेरे ही दरवाजे पे गिराए है कुछ लाल आँसू।
रोशनी भर के नगीना महफूज़ रख लेना,
एक आंसू ही सही तू भी थोड़ा रो लेना।।
बाकी जो मैं रहूं थोड़ा और रोक लेना।
ज़िन्दगी ना सही एक वक्त और झेल लेना।
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