बुधवार, 10 जून 2020

एक मौन

एक मौन आंखों में धरा हैं।
एक इंतज़ार जुबान पर रखा है।
हज़ार रंग मन मे घुले है ।
और एक अधूरा संवाद ,
तेरे ओर मेरे 
दरमियां;
पसरा है ,
सदियों से,
तो ,आओ!
चख ले शब्दों के जायके 
और तोड़ दे बेस्वाद चुप्पी की दीवार।
ज़रा से आखर और एक मौन स्वीकृति,
काफी होगी पूरा करने में,
अधूरा संवाद।
©कविता वर्मा

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