मंगलवार, 16 जून 2020

चाहत

कुछ रेशमी रंग और मखमली शब्द दे दो।
कविता जी उठेगी।
साकार होकर निराकार से,
फिर चल पड़ेगी।
तुम छू कर देखो,
मुझे कुछ
रूहानी स्पर्श दे दो।
केनवास पर बन जाएगी ,
कुछ अनदेखी रेखाएं,
खींच सकेगी मेरी तसवीर,
ऐसी कूची-कलम दे दो।।
बाकी रंग हज़ार ,
और मौसम बहार।
आने दो इन्हें,मुझे एक रास्ता दे दो।।
©कविता वर्मा

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