मौन हूँ ,
निशब्द हूँ,
स्वरचित हूँ,
नगण्य हूँ,
शब्द बन्ध नही,
कल्पना से उपजी चेतना,
मैं सजग कविता हूँ ।।।
©कविता वर्मा
हम -तुम फिर लिख रही हूँ चांद कागज़ पर। सुना है कविता लिखनी छोड़ दी है मैंने। कुछ शब्द तारों से बुने है अभी। रात की कविता। आओ! आज लिखते है चाँद...
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